उठो तुम..

विक्की  आज जल्दी अॉफिस से निकल गया। मन उसका उदास था। घर में खुद को बंद कर लिया। महाराज आये खाने का पूछा तो मना कर दिया। ऐसे ही कितने दिन तक चलता रहा। काम में उसका मन नहीं लगता। खाना भी जो मिलता बेमन खा लेता। बस खोया रहता था। आंखें सूजी सूजी रहती थी। कितने आंसू बहाये थे। पता नहीं कितने दिन से नहीं सोया। घर पर कोई उसे समझाने वाला नहीं था। 

ये सब के पीछे एक लड़की थी। जिससे वह बहुत चाहता था। दो साल से वह उसके बारे में सोच रहा था। पर कहने की हिम्मत नहीं हुई। उससे बात करने से उसे लगता था कि वह उसको पसंद करती है। एक दिन हिम्मत करके उसने कह दिया।  फिर क्या होना था ,उसने मना कर दिया ।' मेरा बाॉय फरेण्ड है '....

क्यों लोग उस चिज़ के पीछे पागल हो जाते हैं जो उसकी थी ही नहीं। उसने ना कहा तो क्यों उसको दिल से लगा लिया अच्छा है ना सब साफ़ हो गया। जो नहीं है वह नहीं है। हमारा खुद का दिल ही जब अपना कहना नहीं मानता तो हम दुसरो को कैसे मना सकते हैं? जो तुम्हारा नहीं उसके पीछे कैसे अपना समय बर्बाद कर सकते हो? क्या तुम इतने फालतू हो ? तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है? कोई सपना नहीं है तुम्हारा ? उसको पूरा करो । गुस्सा आता है मुझे ऐसे लोगों पर जो एक के पीछे खुद को बर्बाद कर देते हैं। अपना जीवन मिट्टी में मिला देते हैं। भूल जाओ उसको जिसने तुम्हारा दिल दुखाया है । माफ़ कर दो उसको । खुद से प्यार करो अपने दोस्तों से मिलो । अपना लक्ष्य बनाओ ।उठ आगे बढ़ो । कुछ कर दिखाओ दुनिया को ।