रिश्ते

सीमा रोज चिड़चिड़ी वह उदास रहती है। वह अपनी सास ननद से परेशान थी। जिन्दगी उसको बोझ लगने लगी थी हर पल उसको यही लगता था। कब उसकी बात का ग़लत मतलब निकाला जाएगा। कब उसको ताने सुनने पड़ सकते हैं । 

क्यों ये रिश्ते बोझ बन जाते हैं?  एक दुसरे को समझना नहीं चाहते। हम सब एक साथ खुशी- खुशी  क्यों नहीं रह सकते? विचार सबके एक जैसे नहीं हो सकते । खुद को एक दूसरे के अनुकूल बनाना पड़ता है। जब यह बात हमको समझ आ जाएगी तभी हम खुशी- खुशी एक-दूसरे के साथ रह सकते हैंऔर जिन्दगी स्वर्ग बन जायेगी।

रिश्तों को हम दो भागों में बांटे तो पहला रिश्ता पति- पत्नी , भाई - बहन,बहन - बहन मां - बेटी , और बाप- बेटा का । इन रिश्तों में झगड़े होते हैं। विचारों का मतभेद होता है तो ज्यादातर हम अनदेखा कर भूल कर वापस एक हो जाते हैं। कहते हैं ना जहां प्यार है वहां झगड़ा होना ही है। अगर झगड़ा या कोई मतभेद नहीं होगा तो इसका मतलब वहां प्यार नहीं समझोता है। उनका वापस पहले जैसे हो जाना ही रिश्ते की परिपक्वता है। 

दुसरे प्रकार के रिश्ते जैसे ननद- भाभी, सास- बहू। इन रिश्तों में जो खट्टास पड़ जाती है वह कभी नहीं मिटती। और घर टुट ही जाते हैं। इन रिश्तों को पहले वाले रिश्तों के जैसा क्यों नहीं समझा जाता? क्यों न  हम  सब बातों को भूलकर एक दूसरे के अनुकूल बनकर खुशी - खुशी साथ रहे।