Jindgi

ऐ दल बदल जिंदगी,

क्यो तु इतनी बेहरम है।

चल तु चल थोड़ा तो चल संग मेरे संग चल।

  क्यो मुखर कदम युं तेरे है।

एक आशियाने की तलाश में,

कितने कदम तेरे चुमे,

दो रोटी की भूख में।

तेरे पीछे हम भागे।

तु मिली ये बेखबर,

 तेरे कितने तलवे चाटे।

एक शाम सुकून की मिले,

साथ कोई अपना सा हो।

ऐसी दिल की चाहत में, 

 हाथ तेरे हमने जोड़े।

ना फुरसत पल की,

ना हंसी होंठों की।

दर्द भरी ये जिंदगी,   

थोड़ी देदे, हां देदे,

 सुकून भरी होठो की हंसी।