मन अशांत क्यो.....

मन अंशात क्यों होता है? क्यों हमारा मन बैचेन रहता है ? मन अंशात होने के कई कारण हैं। कोई चीज हम चाहते हैं जो हमें नहीं मिल रही या कोई इंसान के कारण हम अंशात है । किसी इंसान के कारण अगर हमारा मन अंशात है तो वह कभी शांत नहीं हो सकता। क्यों कि हम किसी इंसान को अपने अनुकूल नहीं बना सकते। अगर हमने उसको अपने अनुकूल बना भी लिया तो क्या होगा कोई न कोई इंसान ऐसा मिल ही जायेगा जो हमें अशांत कर देगा बैचेन कर देगा। यह अंशाति तो अंदर से आती है । यह तो हमारे व्यक्तित्व में होती है। हम अगर किसी से संतुष्ट नहीं , खुश नहीं तो कोई और हमें संतुष्ट कर भी नहीं सकता। एक कहानी आपने सुनी होगी। एक साधू को एक राहगीर पुछता है बाबा यह गांव कैसा है मुझे यहां बसना है मेरा गांव अच्छा नहीं है। वहां के लोग अच्छे नहीं हैं तो साधू ने कहा फिर तुम यहां नहीं रह सकते क्योंकि यहां के लोग तो ओर भी बुरे हैं। थोड़ी देर बाद एक दुसरा राहगीर आया उसने भी यही पूछा बाबा यह गांव कैसा है? मेरे गांव के लोग बहुत अच्छे हैं लेकिन मुझे यहां बसना है। बाबा ने कहा यह गांव बहुत अच्छा है यहां के लोग भी बहुत अच्छे हैं। राहगीर के जाने के बाद उनके चैले ने पूछा बाबा आपने इस गांव को एक को अच्छा दुसरे को बुरा क्यों बताया ? साधू ने कहा वह अपने गांव के लोगों से खुश नहीं था तो है कहीं खुश नहीं रह सकता। अंत में यही कहना चाहती हुं किसी के अनुकूल खुद को बनाने से ही हम खुश रह सकते हैं ।