ऐसे बना मनुष्य का पहला घर ..

यह उस समय की कहानी है जब मनुष्य को घर बनाना नहीं आता था । उसे बाहर खुले आकाश के नीचे सोना पड़ता था । ठंड हो बारिश हो या ज्यादा गर्मी हो , हर मौसम में बहुत मुश्किलें होती थीं उसे । तब उसने अपना अलग घर बनाने की बात सोची । उसने खरगोशों को मिट्टी के ऐर के अंदर घर बनाते हुए देखा था । उसने अपने लिए भी ऐसा ही घर बनाया । लेकिन मुश्किल यह थी कि इस घर की  छत चार - धार उसके सिर पर गिर पड़ती थी । मिट्टी का यह घर मजबूत नहीं था । तब उसने एक ऐसा घर बनाने का तरीका ढूँढा , जिसकी छत बार - बार न गिरे,तो उसने एक पेड़ की शाखाओं को थोड़ा - थोड़ा काटकर , पूरे पेड़ को एक छतरी का आकार दिया । उस पेड़ की छतरी के नीचे वह आराम से सो सकता था । लेकिन इस घर में भी वह ठंड बारिश और गर्मी से पूरी तरह नहीं बच पाता था उसे एक ऐसा घर चाहिए था , जो कि मजबूत भी हो और चारों ओर से बंद भी हो । लेकिन ऐसा घर बनाना तो उसे आता ही नहीं था। एक दिन वह जंगल के पास वाली नदी के किनारे पर घूम रहा था । वहा कुछ गीली मिट्टी थी । मिट्टी में कुछ छोटे - बड़े पत्थर पड़े हुए थे । उसे औजार बनाने के लिए पत्थरों की जरूरत थी । उसने गीली मिट्टी में पड़े हुए एक पत्थर को उठाना चाहा । लेकिन वह नहीं उठा सका कि पत्थर गीली मिट्टी में आधा सँसा हुआ था और चिपक गया था । पत्थर को मिट्टी से निकालने के लिए मनुष्य को काफी मेहनत करनी पडी । लेकिन इस घटना से उसने एक बहुत महत्त्वपूर्ण बात सीख ली । उसने सोचा , ' यदि पुत्थर को मिट्टी में डाल दिया जाए तो वह मजबुत से चिपक जाता है । इसका अर्थ यह हुआ कि यदि दो पत्थरों को एक - दूसरे के ऊपर चिपकाना हो तो बीच में गीली मिट्टी लगा देनी चाहिए। मनुष्य ने यह प्रयोग करके देखा और उसका प्रयोग सफल भी हुआ । बस , फिर तो उसने एक के ऊपर एक पत्थर लगाए और ऊँची दार बना दी । इस तरह से उसने दीवारें बनाना सीखा। फिर उसने तीन ओर दीवारें बनाकर एक कमरा बनाया और छत बनाने के लिए पेड़ की टहनियाँ और पत्ते डाल दिए । और इस तरह बनकर तैयार हुआ मनुष्य का पहला घर ।