तो कहना...

आज ये शाम समा बन जाये।

तुम ना मिल जाओ तो कहना ।।

आई जब याद वफ़ा तुम्हारी,

कुर्बान ना हो जाऊं तो कहना।।

पत्थर सा ❤️ दिल तेरा ,

छुकर मोम ना बन जाओ तो कहना।

तुम सागर बांह फैलाते,

दिल नदियां ना बन जाए तो कहना।

जून की गर्मी में तपती जमीन,

उस पर गिली मिट्टी ना बन जाऊं तो कहना।

कितने दूर यूं निकल गये,

एक छोर ना बन जाऊं तो कहना।।"