जिन्दगी..

कब ये दुख का अम्बर देदे

कब बिछुड़ने का ग़म दे-दे।

पनाह में मुझे कब लेले

कब अभिशाप से अभिशप्त करदे।

फितरत तेरी मेरी जिंदगी 

तु कब बाहों का हार देदे

कब जुदाई का दर्द देदे।

फितरत तेरी मेरी जिंदगी

कब शासन का ताज देदे

कब सड़क की धूल चढ़ादे

फितरत तेरी मेरी जिंदगी।

कब तु हंसी चमन देदे,

कब आशा का लिहाज देदे।

फितरत तेरी मेरी जिंदगी।।

कब तु मुझ पर गुमान देदे,

कब पल की मोहताज बनादे।

फितरत तेरी मेरी जिंदगी।।