हरपल दिल में..

मेंरे दिल में, हरपल ये बात आए,

दबाना चाहूं पर ये निकल आए।

आता हुं शाम को घर में,

सो जाता हुं नींद  की आगोश में।

कब करुं , दिल की चाहते,

रोकना चाहुं पर निकल आए।

दिल तो हरपल मुस्कुराये,

पर बढ़ी जिम्मेदारियां मुझे निहारे।

काम का बोझ और समय की चोटें,

क्यों रह रह जाता हुं उनका होके।

मेरे सपने, ये मेरी उम्मीदें

पर डरता हुं पहले मौत के ना होले।