शायरी

तुम मिले तो क्या मिले सनम,

फिजाओं ने होड़ लगा दी ,मुझे खुश करने की।।

तुम गए तो क्या गए सनम,

हर फिजा ही देने लगी,

आंसू की कतरन मुझे।।

 

उसने कहा हम दिन रात जैसे है एक नहीं हो सकते हैं।

मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा चलो शाम को मिलते हैं।।

 

तुमको भुलाने के लिए जतन हजार करुं।

क्यों न तुम्हारी यादों से ही प्यार करुं।।

आंखों में आंसू मिलने को तड़फु,

क्यों न सपनों पर ही एतबार करुं।।