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जिंदगी के बोल* *कहाँ पर बोलना है* *और कहाँ पर बोल जाते हैं।*

*जहाँ खामोश रहना है* *वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।

* *कटा जब शीश सैनिक का* *तो हम खामोश रहते हैं।*

*कटा एक सीन पिक्चर का* *तो सारे बोल जाते हैं।।*

*नयी नस्लों के ये बच्चे* *जमाने भर की सुनते हैं।

* *मगर माँ बाप कुछ बोले* *तो बच्चे बोल जाते हैं।।*

*बहुत ऊँची दुकानों में* *कटाते जेब सब अपनी।*

*मगर मज़दूर माँगेगा* *तो सिक्के बोल जाते हैं।।*

*अगर मखमल करे गलती* *तो कोई कुछ नहीँ कहता।*

*फटी चादर की गलती हो* *तो सारे बोल जाते हैं।।*

*हवाओं की तबाही को* *सभी चुपचाप सहते हैं।*

*च़रागों से हुई गलती* *तो सारे बोल जाते हैं।।*

*बनाते फिरते हैं रिश्ते* *जमाने भर से अक्सर हम*

*मगर घर में जरूरत हो* *तो रिश्ते भूल जाते हैं।।

* *कहाँ पर बोलना है* *और कहाँ पर बोल जाते हैं*

*जहाँ खामोश रहना है* *वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।

* *गौरव आस्वाद*

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