अरमान...

चलो उन अरमानों को,

आज फिर से सजा लेते हैं।

वो यांदे जो तन्हा थी,

उन्हे फिर से जगा लेते हैं।

क्या लम्हा था वो,

जो बीता उन ख्यालों में।

उन्ही इच्छाओ, उन्ही चाहतो को,

अपना बना लेते हैं।

एक अरसा बीता,

खुद को खुद से बतियाने में,

आज फिर जि ले उन्ही पलों मे।

कुछ पाने की गुजारिश में।।

चलहाथ पकड़ ये ज़िन्दगी,

ले चल उसी जगह,

जहां घंटों बीते बांतों को बतियाने में।