ईश्वर क्या है...

ईश्वर क्या है सोचो तो उस पेड़ में,
जिसकी छांव में वह बैठ रहा, 
वह तो मेरी आत्मा,
जो हर पल मुझमें फल रहा। 
भ्रम में पैदा किया लोगों ने,
मंदिर में उसे बैठा दिया। 
तिनका तिनका पैदा कर ,
शास्त्र वेद फलां दिया। 
ये पंडित और पुजारी बन के दूत भगवान के, 
बेचारे हम फंस गए उनके नियम धर्मकांड में। 
बाबा के चक्कर में फंसी ,
तुम्हारी अंधी तुम्हारी भक्ति, 
ईश्वर क्या है
यह तो है एक आस्था
विश्वास उस चरम बिन्दु का ,
यह तो मेरा दिल है,
जो मुझमें, बस मुझमें बसा।"